अर्चना तिवारी-अभिलाषा के मकर संक्रांति के दोहे

सूरज को नित अर्ध्य दे , करिये उसे प्रणाम ।
चंचल मनवा शांत हो, भली करेंगे राम ।।



गंगा  में नित स्नान से, मिटे सकल संताप।
धारा जो दूषित करे, लगता उसको पाप ।।


 


मकर राशि  में भानु जी, करेंगे अब प्रवेश ।
स्नान दान करते सभी,मेटे सकल कलेश।।



 मकर संक्रांति आ गई ,फिर भी शीत प्रचंड ।
तिल गुड़ के सेवन से, कटती कुछ कुछ ठंड ।।



खिचड़ी बीहू लोहड़ी  सबके अपने नाम ।
नई फसल का आगमन,खुशियाँ लाय तमाम ।।



संतति मंगल कामना,करती जननी आज।
संकट सारे दूर हों, विघ्नहरण गणराज ।। 



भारत के हर प्रांत में,छाई अजब बहार ।
डोर पतँग लेकर सभी,मना रहे त्यौहार ।।



रंग बिरंगी पतंगे, छायी हैं  आकाश 
दिनकर आए मन मुदित , दिखला रहे प्रकाश ।।


अर्चना तिवारी-अभिलाषा
    


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