पाकिस्तान के खिलाफ़ ठोस और निर्णायक कार्रवाई किए जाने की आवश्यक्ता - जनरल विपिन रावत

 दिल्ली:  सीडीसी जनरल बिपिन रावत ने आतंकवाद पर पाकिस्तान के खिलाफ़ ठोस और निर्णायक कार्रवाई किए जाने की वकालत की है. जनरल रावत ने दिल्ली में गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ब्लैकलिस्टिंग जैसे कदम अहम है. मगर यदि वो प्रभावी साबित नहीं होते तो भारत अधिक कड़े कदम उठाने के हक में है.


विदेश मंत्रालय और ठीक टैंक ओआरएफ के संयुक्त मेज़बानी में मेजबानी में आयोजित रायसीना डायलॉग के मंच पर आतंकवाद के मुद्दे पर हुई चर्चा के दौरान जनरल रावत ने कहा कि एक तरफ आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में शामिल मुल्कों को आतंकियों की पनाहदारी की इजाजत नहीं दे जा सकती. जनरल रावत के मुताबिक एफएटीएफ की तरफ से पाकिस्तान की ब्लैकलिस्टिंग के प्रयास मत्वपूर्ण सन्देश है. साथ ही कूटनीतिक तौर पर अलग-थलग करने का प्रयास भी अहम हैं


हालांकि भारत में तीनों सेनाओं के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी जनरल रावत ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के प्रायोजकों के रहते इसके खत्म होने की उम्मीद बेमानी है. आतंकवाद का खतरा बरकरार है और उससे मुकाबले के लिए सख्त कदम उठाना भी ज़रूरी है. महत्वपूर्ण है कि आतंक की आर्थिक रसद बैंड करने कस लिए आर्थिक नाकेबंदी सुनिश्चित करने व्वाली यूएन संस्था एफएटीएफ ने पाकिस्तान को फरवरी 2020 तक का समय दिया है आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए. वहीं यदि पाक एफएटीएफ के तय पैमानों पर कार्रवाई करने में नाकाम रहता है तो उसे काली सूची में डाल जा सकता है. इस मामले में पाक की समीक्षा फरवरी के तीसरे सप्ताह में होनी है.


जनरल रावत ने चरमपंथ और कट्टरवाद की चिंताओं पर भी जोर दिया. उनका कहना था कि कट्टरपंथ के स्रोत पर कार्रवाई करने की ज़रूरत है. खासकर ऐसे में जबकि 10-12 साल के बच्चों को भी चरमपंथी बनाने के प्रयास हो रहा है. इस समस्या का मुकाबला किया जा सकता है. मगर स्कूल, कॉलेज, धार्मिक संस्थाओं समेत कई स्तर पर कार्रवाई करनी होगी.


महत्वपूर्ण है कि 2016 में उड़ी के आतंकी हमले के बाद उप-सेना प्रमुख के तौर पर जनरल रावत पाकिस्तानी कब्जे वाले इलाके में सर्जिकल स्ट्राइक की योजना में शरीक रहे. साथ ही पुलवामा आतंकी हमले का बाद हुई वायुसेना की बालाकोट एयर स्ट्राइक पर भी सैन्य सलाह-मशविरे का हिस्सा थे. देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के तौर पर उनकी नियुक्ति साथ ही उच्च सैन्य प्रबंधन के अनेक मामलों को उनके हाथ सौंपा गया है.