संतान प्राप्ति के लिए आयुर्वेद में बताये गए महत्वपूर्ण  नियम

 



संतान प्राप्ति के लिए आयुर्वेद में बताये गए महत्वपूर्ण  नियम

 

सौजन्य से  स्नेहा समूह

 

🥀हमारे पुराने आयुर्वेद ग्रंथों में पुत्र-पुत्री अर्थात संतान प्राप्ति हेतु दिन-रात, शुक्ल पक्ष-कृष्ण पक्ष तथा माहवारी के दिन से सोलहवें दिन तक का महत्व बताया गया है। धर्म ग्रंथों में भी इस बारे में जानकारी मिलती है के किस समय सम्भोग करने से लड़का होगा और कब लड़की होगी.
🌹पुत्र पुत्री प्राप्ति के नियम – संतान प्राप्ति के नियम – पुत्र या पुत्री अर्थात संतान प्राप्ति करना चाहते हैं और वह भी गुणवान, तो हम यहाँ माहवारी (Periods) के बाद की विभिन्न रात्रियों की महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं। यह गणना पीरियड्स शुरू होने के बाद से शुरू होती है। जैसे 1 तारीख को पीरियड्स आये तो चौथा दिन अर्थात चौथी रात्रि है. अक्सर पीरियड्स ३ दिन रहते हैं इसीलिए उसके बाद चौथे दिन से ही आयुर्वेद में ये गणनाएं शुरू की गयी हैं. और सोलहवी रात्री तक ही संतान उत्पत्ति के लिए गृहस्थ के लिए कहा गया है. सोलहवी रात्रि के बाद गृहस्थ करने से संतान नहीं होती और ना ही गर्भ रुकता है. आधुनिक विज्ञानं तो इसको चौदहवी रात्रि के बाद ही संतान ना रुकने की बात को स्वीकारता है. संतान प्राप्ति के नियम

🌺चौथी रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र अल्पायु और दरिद्र होता है।
🍂पाँचवीं रात्रि के गर्भ से जन्मी कन्या भविष्य में सिर्फ लड़की पैदा करेगी।
🌹छठवीं रात्रि के गर्भ से मध्यम आयु वाला पुत्र जन्म लेगा।
,🌻सातवीं रात्रि के गर्भ से पैदा होने वाली कन्या बांझ होगी।
🌻आठवीं रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र ऐश्वर्यशाली होता है।
🌺नौवीं रात्रि के गर्भ से ऐश्वर्यशालिनी पुत्री पैदा होती है।
🌺दसवीं रात्रि के गर्भ से चतुर पुत्र का जन्म होता है।
🥀ग्यारहवीं रात्रि के गर्भ से चरित्रहीन पुत्री पैदा होती है।
🥀बारहवीं रात्रि के गर्भ से पुरुषोत्तम पुत्र जन्म लेता है।
🥀तेरहवीं रात्रि के गर्म से वर्णसंकर पुत्री जन्म लेती है।
,🥀चौदहवीं रात्रि के गर्भ से उत्तम पुत्र का जन्म होता है।
🥀पंद्रहवीं रात्रि के गर्भ से सौभाग्यवती पुत्री पैदा होती है।स्नेहा आयूर्वेद ग्रूप
🥀सोलहवीं रात्रि के गर्भ से सर्वगुण संपन्न, पुत्र पैदा होता है।
,🥀पुत्र पुत्री प्राप्ति के नियम – व्यास मुनि ने इन्हीं सूत्रों के आधार पर पर अम्बिका, अम्बालिका तथा दासी के नियोग(समागम) किया, जिससे धृतराष्ट्र, पाण्डु तथा विदुर का जन्म हुआ। महर्षि मनु तथा व्यास मुनि के उपरोक्त सूत्रों की पुष्टि स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपनी पुस्तक ‘संस्कार विधि’ में स्पष्ट रूप से कर दी है। प्राचीनकाल के महान चिकित्सक वाग्भट तथा भावमिश्र ने महर्षि मनु के उपरोक्त कथन की पुष्टि पूर्णरूप से की है।

 

🌺संतान प्राप्ति के नियम

🌹जिन माओं ने गर्भ में बेटी की हत्या करवा दी उनका दंड जब भगवान् लिखेगा तो उनकी कोख भी खून के आंसू रोएगी.

🌹दो हजार वर्ष पूर्व के प्रसिद्ध चिकित्सक एवं सर्जन सुश्रुत ने अपनी पुस्तक सुश्रुत संहिता में स्पष्ट लिखा है कि मासिक स्राव के बाद 4, 6, 8, 10, 12, 14 एवं 16वीं रात्रि के गर्भाधान से पुत्र तथा 5, 7, 9, 11, 13 एवं 15वीं रात्रि के गर्भाधान से कन्या जन्म लेती है।
🌹2500 वर्ष पूर्व लिखित चरक संहिता में लिखा हुआ है कि भगवान अत्रिकुमार के कथनानुसार स्त्री में रज की सबलता से पुत्री तथा पुरुष में वीर्य की सबलता से पुत्र पैदा होता है।
🌻प्राचीन संस्कृत पुस्तक ‘सर्वोदय’ में लिखा है कि गर्भाधान के समय स्त्री का दाहिना श्वास चले तो पुत्री तथा बायां श्वास चले तो पुत्र होगा।
🌻युनान के प्रसिद्ध चिकित्सक तथा महान दार्शनिक अरस्तु का कथन है कि पुरुष और स्त्री दोनों के दाहिने अंडकोष से लड़का तथा बाएं से लड़की का जन्म होता है।
,🌻चन्द्रावती ऋषि का कथन है कि लड़का-लड़की का जन्म गर्भाधान के समय स्त्री-पुरुष के दायां-बायां श्वास क्रिया, पिंगला-तूड़ा नाड़ी, सूर्यस्वर तथा चन्द्रस्वर की स्थिति पर निर्भर करता है।


🥀संतान प्राप्ति के नियम – लेखक के विचार.
संतान प्राप्ति के नियम –🌺 ये लेख इसलिए लिखा गया है   लोग भ्रूण हत्या से बच सकें, क्यूंकि जिन लोगों के दिमाग में सिर्फ लड़का प्राप्त करने की ही जिद है वो इस पोस्ट को फॉलो कर के कम से कम इस पाप से तो मुक्त रह सकें, सारी दुनिया पागल है, चाहते हैं के उनको लड़का लड़का और सिर्फ लड़का ही हो, आज जब चारों तरफ नज़र दौडाता हूँ तो कहीं भी ऐसे माँ बाप नहीं पाता जो बुढापे में ये सीना ठोक के कह सकें के उनको गर्व है के उनके घर लड़का पैदा हुआ है. और ऐसी अनेक बेटियां जो घरों से चाहे हजारों किलोमीटर दूर हों, वो बेचारी हमेशा अपने माँ बाप का ही सोचती रहती हैं. वाह री दुनिया. लड़के लड़की में भेद ये पाप नहीं है बल्कि अपने द्वारा खुद ही तय की गयी एक सजा है जो भुगतनी ही पड़ेग इस ग्रुप पर उपलब्द सभी जानकारी और लेख केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार हेतु बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए। चिकित्सा परीक्षण और उपचार के लिए हमेशा एक योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।