चीन का जवाब देने के लिए तकनीकी और वैचारिक स्तर पर मजबूत होना होगा - स्वामी दिव्यज्ञान जिज्ञांशु

 झारखंड प्रांत की आभासी बैठक संपन्न

रांची।


चीन की विस्तार वादी नीतियों का जवाब देने के लिए हमें तकनीकी और वैचारिक दोनों स्तर पर मजबूत होना पड़ेगा। जब तक हम तकनीकी और वैचारिक स्तर पर मजबूत नहीं होंगे तब तक हम चीन का मुकाबला नहीं कर सकते। 

यह बात कर देर रात भारत तिब्बत समन्वय संघ की झारखंड प्रांत के कार्यकर्ताओं की आभासी बैठक में संगठन के क्षेत्र मार्गदर्शक स्वामी दिव्यज्ञान जिज्ञांशु ने कही।

उन्होंने कहा आज जिस प्रकार आज तिब्बत पर अपना कब्जा कर वहां मानवाधिकारों का हनन कर रहा है, वहां की संस्कृति को मिटाने पर आमादा है उसका वैश्विक स्तर पर प्रत्युत्तर आवश्यक है। इसके लिए हमें निचले स्तर तक समाज के प्रबुद्ध लोगों को जोड़कर उन्हें वैचारिक स्तर पर भी मजबूत करना होगा।

बैठक में राष्ट्रीय महामंत्री श्री विजय मान ने कहा कि हम सब कैलाश की मूर्ति हो तिब्बत की आजादी के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करें अपने लक्ष्य पर अपना ध्यान केंद्रित रखें तभी विजय सुनिश्चित है।

संगठन के केंद्रीय अनुशासन समिति का सदस्य श्री शंकर शर्मा ने कहा कि संगठन चलाने में अनुशासन का बड़ा महत्व है। कोई भी संगठन तभी आगे बढ़ता है जब वह अनुशासित होकर काम करें।

बैठक का संचालन कर रहे संगठन के केंद्रीय मंत्री वह झारखंड के प्रभारी श्री विवेक सोनी ने सभी कार्यकर्ताओं को अपने अपने क्षेत्र मेंसंगठन को मजबूत करने के लिए नए नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने पर जोर दिया।

प्रांत प्रभारी श्री अभय मिश्रा प्रांत अध्यक्ष श्री ठाकुर मुकेश सिंह ने सभी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया और न्यूनतम 15 दिन में एक बार आभासी रूप में बैठकर संगठन की योजना रचना बनाने का आश्वासन दिया।

बैठक में केंद्रीय परामर्श दात्री समिति के सदस्य पूर्व डीजीपी श्री दिनेश पांडे, मानवाधिकार संरक्षण प्रभारी के राष्ट्रीय संयोजक श्री प्रवीण मिश्रा सहित अभिषेक चौबे, डा0 अर्चना पाठक, कमलेश सिंह, श्रीमती किरण मिश्रा, रितेश तिवारी, सतीश सिंह आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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