शिशु के दांत निकलते वक्त होने वाली परेसानियों को दूर करते है यह घरेलू इलाज

*शिशु के दांत निकलते वक्त होने वाली परेसानियों को दूर करते है यह घरेलू इलाज*


जन्म के कुछ महीने बाद बच्चों के दांत निकलने लगते हैं। दांत निकलते समय बच्चों में कई प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं। यदि बच्चे कमजोर हो तो उनमें अधिक रोग उत्पन्न होते हैं। दांत निकलने के समय बच्चे दस्त से अधिक पीड़ित होते हैं। कुछ बच्चे पेट दर्द से और कुछ कब्ज से परेशान रहते हैं। दांत निकलने के समय मसूढ़ों में खुजली, सूजन तथा अधिक पीड़ा होती है। गंदें बोतलों से दूध पीने तथा मिट्टी खाने वाले बच्चे दांत निकलते समय अधिक रोग से पीड़ित होते हैं। मां द्वारा अधिक सख्त व ठंड़े पदार्थ खाने से भी दांत निकलते समय बच्चा रोगों का शिकार हो जाता है।


लक्षण :


बच्चों के दांत निकलने के समय सिर गर्म रहने लगता है, मसूढ़ों में खुजली होती है, आंखे दुखने लगती है और बार-बार दस्त लगते है। दांत निकलते समय पेट में दर्द व कब्ज भी उत्पन्न होती है।



विभिन्न औषधियों से उपचार-


1. बच : जब बच्चे के दांत निकल रहे हो तो लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग बच के टुकड़े को रोजाना दो बार बच्चे को चबाने के लिए देना चाहिए। इससे दांत निकलते समय का दर्द नहीं होता है।


2. वायविडंग : बच्चे के दांत उगने के समय बच्चों को वायविडंग और अनन्तमूल डालकर उबाला हुआ दूध रोजाना एक से दो बार पिलाने से बच्चों का पेट फूलना, उदर शूल (पेट में दर्द), कुपचन (भोजन न पचना) और अग्निमांद्य (भूख का कम होना) आदि शिकायतें नहीं होती और दांत भी आसानी से निकल आते हैं।
3. डिकामाली : लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग नाड़ीहिंगु (डिकामाली) एक तरह का गोंद को गर्म पानी में मिलाकर और छानकर सुबह-शाम पिलाने से बच्चों के दांत निकलने के समय के सभी दर्द जैसे दस्त, उल्टी, उदरशूल (पेट का दर्द) आदि सभी रोग दूर हो जाते हैं।


4. मैनफल : बच्चों के दांत निकलने(bachon ke dant nikalne) के समय बुखार आदि जैसे रोग होने पर मैनफल के गूदे के चूर्ण को तालु और मसूढ़ों पर रगड़ने से आराम आता है।


5. ईश्वरमूल : लगभग आधे ग्राम से लेकर 15 ग्राम ईश्वरमूल (रूद्रजटा) के पंचांग का चूर्ण सुबह-शाम कालीमिर्च के साथ शहद मिलाकर खाने से दांत निकलने के समय के बच्चों के सारे रोग ठीक हो जाते हैं।
6. काकड़ासिंगी : बच्चों के दांत निकलने के समय जब बुखार, खांसी, अतिसार (दस्त) और दूसरे पेट के रोग हमला करते हैं तो ऐसी हालत में काकड़ासिंगी, अतीस, छोटी पीपल बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर कपडे़ में छानकर रख लें। इसमें से लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग रोजाना शहद के साथ दो से तीन बार चटाने से बहुत आराम आता है। यदि इसमें नागरमोथा भी मिला दिया जाये तो कार्यक्षमता और बढ़ जाती है तथा वमन (उल्टी) आदि रोग भी ठीक हो जाते हैं


8.तुलसी : तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर मसूढ़े पर घिसने से बालक के दाँत बिना तकलीफ के उग जाते हैं।


7.मुलहठी : मुलहठी का चूर्ण मसूढ़ों पर घिसने से दाँत जल्दी निकलते हैं।


8.सौंफ: गाय के दूध में मोटी सौंफ उबालकर एक -एक चम्मच तीन चार बार पिलाने से दाँत आसानी से निकलते है।


9. चुना :- जीरे के बराबर चुना दूध छोड़कर किसी भी लिक्विड में देने से बच्चे तीव्र बुद्धि, अच्छी लम्बाई, व अन्य रोगों 70 साध्य असाध्य रोगों से मुक्त रहते हैं।
मातृदुध दूध पीने बाले बच्चे की माँ को चुना का उपयोग करना चाहिये पथरी हो तो न करें।


10.होमेओपेथी की एथूजा, कैल्फास, पोडोफा इल्म,फाइटोलक्का,मैगमयूर, व BC 21 



11.  Teething trouble
Carica papaya Q-20 drops , 
Gingiber Q-20 drops , 
nux vom 30- twenty drops 
ashwagandha Q-20 drops


Ye sab mix karke rakh len aur isme se four drops 💧 ko 1/4 cup water 💦 me mix karke pilane se teething ke time par hone wale complications, indigestion, gas etc nahi hote hai


होमओपैथी की पुस्तक के आधारः पर लक्षणानुसार


● दांत निकलते समय बच्चा दर्द सहन न कर सके, चिल्लाये; सिर्फ गोद में उठाने से शांत हो - (कैमोमिला 30, दिन में 3 बार)


●  दांत निकलने के दिनों में बच्चे का शरीर ऐंठना - (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)


●  मोटे, थुलथुले बच्चों में दस्त हो, हड्डियां कमजोर हो, सिर पर पसीना आये - (कल्केरिया कार्ब 200, 2-3 खुराक) 


●  बच्चा दिन में खुश रहे मगर रात में परेशान करे -(लाइकोपोडियम 30, दिन में 3 बार)


● दांत निकलते समय लकवा हो जाये - (काली फ़ॉस 6X, दिन में 4 बार)


● दांत निकलते समय पतले दस्त, जो मात्रा में बहुत अधिक हो, बच्चा मसूड़ों को दबाता रहे - (पोडोफाइलम 30, दिन में 3 बार)


● दांत देर से निकले, खासकर जब परिवार टी. बी. के रोग का इतिहास हो - (ट्यूबरकुलाइनम 200, 15 दिन में 1 बार)


● मन्द बुद्धि के बच्चों के लिए - (बैराइटा कार्ब 30, दिन में 3 बार)


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