अमेरिकी मिसाइल सुरक्षा प्रणाली की ऊंची कीमत से भारत चिंतित, अब सुरक्षा के दूसरे विकल्पों पर विचार

नई दिल्ली। भारत सरकार अमेरिकी मिसाइल सुरक्षा प्रणाली की अत्यधिक ऊंची कीमत को लेकर चिंतित है। लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन जैसे हथियारों के हमलों से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए सरकार इस सुरक्षा कवच को खरीदना चाहती है। अमेरिका की सरकार ने पिछले हफ्ते एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (आइएडीडब्ल्यूएस) भारत को बेचने की मंजूरी दी थी। अमेरिका की तरफ से इस सौदे की कीमत 1.9 अरब डॉलर (लगभग 13000 करोड़ रुपये) तय की गई है। इसके तहत भारतीय वायुसेना को विभिन्न तरह के रडार और मिसाइल प्रणाली मिलेगी।


सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत को अनुमान था कि यह सौदा एक अरब डॉलर यानी लगभग सात हजार करोड़ रुपये में हो जाएगा। इस तरह कीमतों में लगभग दोगुना का अंतर है। सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार सौदे की ऊंची कीमत को देखते हुए दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रही है। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भी जुलाई, 2018 में इस प्रोजेक्ट की कीमत लगभग एक अरब डॉलर तय की थी। भारत ने रूस की मिसाइल सुरक्षा प्रणाली के स्थान पर इस सुरक्षा प्रणाली को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी। इसे दिल्ली की सुरक्षा के लिए वायु सेना के दिल्ली कमान में तैनात किया जाना है, जहां अभी रूसी सुरक्षा प्रणाली को तैनात किया गया है


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