परमात्मा की प्राप्ति करनी है तो संसार की अनुकूलता और प्रतिकूलता दोनों को सहना पड़ेगा

राम।।🍁


        🍁 *विचार संजीवनी* 🍁


*परमात्मा की प्राप्ति करनी है तो संसार की अनुकूलता और प्रतिकूलता दोनों को सहना पड़ेगा।* दोनों से ऊँचा उठना ही पड़ेगा। न अनुकूलता में राजी होना है, न प्रतिकूलता में राजी होना है, प्रत्युत भगवान की मरजी में राजी होना है। न अनुकूलता ठहरेगी न प्रतिकूलता ठहरेगी--यह बिल्कुल निश्चित पक्की बात है। किसी के भी जीवन में अनुकूलता भी नहीं ठहरी, और प्रतिकूलता भी नहीं ठहरी। अनुकूलता-प्रतिकूलता आती-जाती रहती है। *पक्की बात, सच्ची बात, कल्याण की बात, उद्धार की बात, सुधार की बात है--अनुकूलता-प्रतिकूलता को सह लो।* साधु हो या गृहस्थ हो, भाई हो या बहन हो, पढ़ा-लिखा हो या अपढ़ हो, विद्वान हो या मूर्ख हो, यह काम सबको करना है।


शरीर के अनुकूल-प्रतिकूल, मन के भी अनुकूल-प्रतिकूल, बुद्धि के भी अनुकूल-प्रतिकूल, सिद्धांत के भी अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थिति आती है, तो उसमें सम होना ही पड़ेगा, तभी संसार से ऊँचा उठोगे, तभी परमात्मा की प्राप्ति होगी।


राम !           राम !!               राम !!!


परमश्रधेय स्वामी जी श्री रामसुखदास जी महाराज


- *बन गए आप अकेले सब कुछ..* पृष्ठ 159


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