बीजिंग ओलंपिक का भारत सरकार द्वारा विरोध बीटीएसएस की बड़ी जीत - जुयाल


 जल्द ही तिब्बत और कैलाश मानसरोवर चीन के कब्जे से मुक्त होंगे - हेमेंद्र तोमर

नई दिल्ली।
भारत तिब्बत समन्वय संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर प्रयाग दत्त जुयाल का कहना है कि चीन के बीजिंग शहर में होने जा रहे विंटर ओलंपिक का भारत सरकार द्वारा राजनीतिक विरोध किया जाना यह भारत तिब्बत समन्वय संघ के उन विचारों की जीत है जिसको संगठन ने 1 वर्ष पूर्व प्रारंभ किया था। गत वर्ष भारत तिब्बत समन्वय संघ द्वारा आयोजित गलवान विजय दिवस पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया था। उसमें बड़ी संख्या में देश विदेश के लोग जुटे। उसमें भारतीय सैनिकों के पराक्रम की चर्चा और चीनी सैनिकों के कुकृत्य का विषय अंतरराष्ट्रीय पटल पर आया, उसी से बीजिंग में होने वाले विंटर ओलंपिक के विरोध की नींव रखी जा चुकी थी।
श्री जुयाल ने कहा कि बीटीएसएस के हिमाचल प्रदेश अध्यक्ष श्री बी आर कौंडल ने अक्तूबर में शिमला में पत्रकार वार्ता आयोजित कर बीजिंग ओलंपिक के खिलाफ हुंकार भरी थी। उसके बाद सारे देश में आवाज उठने लगी कि भारत सरकार को बीजिंग ओलंपिक का विरोध करना चाहिए। उन्होंने बताया कि विरोध का यह स्वर तब और मुखर हुआ जब राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में आये10 प्रस्ताव में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव बीजिंग ओलंपिक के विरोध का था। जिसे केन्द्र सरकार को भी भेजा गया था। 
भारत तिब्बत समन्वय संघ के राष्ट्रीय महामंत्री श्री अरविंद केसरी का कहना है कि हमारे प्रस्ताव पर भारत सरकार विचार कर रही है, इसका एहसास तभी हो गया था जब लखनऊ, बनारस सहित देश के कई स्थानों पर केंद्रीय गुप्तचर विभाग ने संगठन के  पदाधिकारीयों से बातचीत की और उनसे पूछा कि इसका विरोध किस स्तर तक करने जा रहे हैं। 
संघ के केंद्रीय संयोजक श्री हेमेंद्र तोमर तो यहां तक कहते हैं कि तिब्बत और कैलाश के मुद्दे पर लड़ने वाले अनेकों संगठन होने के बावजूद जिस मुखरता के साथ भारत तिब्बत समन्वय संघ अपनी बात रखता है और इस वैचारिक युद्ध में जितने धुरंधर यौद्धा उनके पास है इतने अन्य किसी के पास नहीं है। श्री तोमर ने विश्वास जताया कि वह दिन दूर नहीं जब तिब्बत और कैलाश मानसरोवर चीन के कब्जे से मुक्त हो जाएगा।
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